Thursday, 26 June 2014

Anant Yatra Ke pathik Part 2



चाह तड़प और प्यास

    अब मन की स्थिति बदल गई थी ध्यान एवं मनन की अभिलाषा लिए नागपुर में दिन काटने लगा सहज मार्ग एवं रामचन्द्र मिशन को ढूढने की कोशिश में लग गया टी.वी प्रोग्राम देखे ,कही नाम निशान नही हैं, इधर उधर पूछताछ किया,कोई नही जानता क्या करु ,कहा जाऊ मन व्याकुल  सा रहने लगा है। जब मै अवाडी मद्रास में कार्यरत था,तो नागपुर परिचय केक भाई से सामान खरीद फरोख्त के चक्कर में हो गया मैने सोचा भाई गणेश अय्यर की दुकान जो गंगाबाई घाट रोड पर थी,क्यों न चलकर मिले सोचता था भूल जाता था एक दिन अचानक ही शहर में घूमते घुमते विचार आया और उनसे मिलने चल पड़ा, पूछताछ करते हुए उनकी दुकान पर जा पहुचा।
          हाल चाल पूछने के बाद कुछ काम की बाते की एकाएक चारी जी की बड़ी फोटो पर नजर गई तो पूछ ब ;ेठा ऐ फोटो वाले आपके कौन हैं, उन्होंने तुरंत बताया मेरे दादाजी हैं। सुनकर अहोभाग्य माना चलो कुछ तो अंजान गुरु की गुथी सुलझी :मेने कहा आपके धन्यभाग्य जो ऐसे शक्स आपके परिवार में हैं। मै तो इनकी तलाश कई महीनों से कररहा हू. न इनका पता चल रहा था और रामचन्द्र मिशन का एसा लगा तलाश पूरी हो गई।
        पुछा रामचन्द्र मिशन में प्रवेश कैसे मिल सकता हैं बहुत संजीदगी से भाई ने बताया की आसान काम नही हैं'मिशन द्वारा इम्तहान लिया जाता हैं. यदि पास हो गए तभी संभव है .अब मेरी बेचैनी और घबराहट बढ़ गई। पुछा की कोई तो उपाय होगा ,एसा लगा जीवन फिर निर्थकता में बीत जायगा।
       कहने लगे घबराने की बात नही है, मेरे पास काफी साहित्य हैं। उन्हें आप ले जाइये और छ: सात महीने तयारी करे,पास हो जायंगे। मेरी  जान में जान आई और सोचा जैसी हरी इच्छा, यही सही उनसे कई पुस्तके एवं मैगजीन लेकर वापस आया और अध्यन में लग गया। इससे पहले मेरी आदत थीउपन्यास,मैगजीन जो कुछ प्राप्त कर पढ़कर ही दम लेना अंग्रेजी का उपन्यास दो दिन में हिन्दीके उपन्यास को एक दिन में ही खत्म कर देता था।
मिशन की  पुस्तके पढने से;पहले कुछ समझ नही आया दोबारा धीरे धीरे पृष्ठ दर पृष्ठ पढ़ा तब कुछ बाते भेजे में उतरी काफी उठा पटक किया तब मकसद की पूछ पकड़ पाया। बढ़ी लगन से तयारी इम्तहान करता रहा। फिर सोचता केसा प्रशन केसा जबाब सोचा प्रोशोनोत्रि बना ल़ू फिर मन में आया बेकार ख्याल हैं छोड़ दिया।
       कई महीने बीत गए, उन्ही दिनों मेरे कई एक्सिडेंट हो गए मरते मरते बचा। कौन बचाया केसे बचा कुछ पता नही परन्तु हमेशा लगता रहा की एक अनजानी शक्ति है जो मुझे बचा रही हैं, और दूसरी शक्ति मेरा खात्मा  चाहती हैं,किसी ने कहा ज्योतिषी से परामर्श कर ले। समय खराब चल रहा होगा,मेने कहा  vishvas नही ज्योतिष पर फिर काफी जोर पढने पर मेने सोचा क्यों न ज्योतिष सीखा जाऐ और अगर तथ्थ एवं सच्चाई हैं तो स्वयम ही पता लगा लूँगा ।
इन भटकाव वाले दिनों में स्वयम ध्यान एवं ज्योतिष का स्वयम अध्ययन पूरे जोरो से सुरु हो गया। अंक ज्योतिष से सुरु किया तो पाया,अंको में कुछ तो हैं। अपने बारे मेही अंक शास्त्र द्वारा खोजबीन जारी रखा ,कुछ हद तक स्वयम से पर्दा उठा और मन लग गया।
इन दिनों गाहे विहागे मेरा सम्पर्क भाई गणेश से बना रहा,उन्होंने एक बुजुर्ग भाई bl भाटिया से कराया,मुझे वे काफी अच्छे लगे सो उन्सेस्म्पर्क बढ़ गया फिर अंकशास्त्र के अध्यन एवं प्रेक्टिक्ट्स की वजह भाटिया जी का मेरे घर आना जाना सुरु हो गया। वो कुछ समस्या लाते और मै उनका समाधान ढूढने की कोशिश करता ,और उन्हेलिख कर दे देता यह सिलसिला कुछ महीने तक चलता रहा।
         अब पुणे से ध्यान की सुरुआत हुई करीब सात आठ महीने से गए थे,मन की ललक एवं प्यास बढ़ती जा रहीथी,की कब इम्तहान हो और  मै पास होकर सहज मार्ग से जुड़ जाऊ गुरु से मिलने कि अभिलाषा तो पैदा ही नही हुई,ह हमेशा लगता रहा गुरुएव्म ईशवर जो भी हैं मेरे साथ हैं। मेरे पास है वही मुझे निरंतर आती विपदाओ सेबचा रहा हैं, इम्तहान के समय का पूरी उत्सुकता से इंतजार करता रहा.कब  भाई का बुलावा आये और कहे चलो ,परसों इम्तहान मे बैठना हैं।ं
आशा और निराशा में फूलता मन काफी बेचैन सा रहने लगा इम्तहान हुआ और फेल हो गया,तो कारण सिर्फ यह था की
        इम्तहान येन केन प्रकारेण पास कर लेता था,फेल कभी नही हुआ अव्वल नम्बर कभी नही मिला, बस यही उघपोह में जीवन बिता रहा था । अगस्त का महिना था बारिश के दिन थे,16अगस्त 2002का दिन था ,अचानक भाटिया साहब घर आ  गये , मैने  उनका स्वागत सत्कार किया । एवं उनकी  समस्याओ का जो भी निराकरण कर सकता था किया उनसे ज्योतिष एवं जीवन पर  चर्चा करता।
        बहुत दिनों से मन में इच्छा थी की इनसे सहज मार्ग के बारे में पूछताछ करू फिर यह सोचता क्या पता जब इतने सारे लोगो कों नही पता तो क्या ये खाक जानते होंगे हिम्मत करके आज उनसे पूछ ही लिया ,क्या आप सहज मार्ग से वाकिफ है,और यदि ह तो उनके प्रवेश परीक्षा कब होगी जिससे मै भी एक अभ्यासी बन सकू।
       बड़े आशचर्य से उन्होने पुछा बात क्या है, कई महीनों से आपके घर आता जाता रहा हू, आपने कभी जिक्र नही किया अब बड़े बुरे मन से पूरी कहानी विस्तार से बताई और कहा की इम्तहान की तारीख का इंतजार कर रहा हू। पता नही कब होगा बोले किसने कहा इम्तहान होता है ,मैने बताया भाई गणेश ने कहा है, कहने लगे गणेश से बात कराओ मैने गणेश को फोन लगाकर भाटिया साहब को दे दिया,
        जब भाटिया साहब ने फोन पर डाटना किया तो मेरे आशचर्य का समय था। पूछने लगे क्यों कहा इम्तहान होता है'इन्हें सच्चे मन से रास्ता क्यों नही बताया।प्रेस्पेटर के सामने क्यों नही ले गए बाद में भाई ने बताया वह बात तो  मजाक में कहा था। इतना गंभीर क्यों ले लिया,खैर जो होना था वो हो गया।
       भाटिया साहब ने पुछा कब से प्रेस्पेटर के साथ पूजा शुरु करना है मैने बिना सोचे कहा अभी और आज से मन में आया कही ये मोका छूट न जाय तुरंत फोन प्रेस्पेटर के घर किया दिन गुरुवार था। उन्होंने कहा एक घंटा मै उनके घर करीब पाँच बजे जाना हैं क्युकी जो भाई उनके घर पूजा के लिए आने वाले थे उनका एक घंटा विलम्ब से जाना था।
        मुझे एसा लगा की अंत एक बड़ी सौगात हाथ लगी है चूकना नही हैं,फ़ौरन हामी भरकर तयार होकर भाई के साथ प्रिस्टर shiri और प्रथम पूजा विधि पूर्वक किया तीन दिन पूजा के बाद एसा लगा की जन्म जन्म का बोझ उतर गया हैं, एक रास्ता जीवन में एसा मिला की जीवन में बद,लाव का संकेत मिल गया। स्वर्ग एवं नरक प्राप्ति की भावना ही मन से तिरोहित हो गई। लालच या डर सब भाग गया ह्रदय शेर की भाती निडर हो गया।
        सच कहु तो भाई गणेश पर सुर में काफी गुस्सा आया,फिर बाद में एहसास हुआ गुरु तो मुझे तयार कर रहे थे। और अपनी कृपया द्वारा हमारे संस्कारो के बंधन के mkdjalo को दूर करके अपने प्यार एवं स्नेह का दीप दिखाया, अन्यथा मेरा भागता मन कहा मानता जो समय अध्यन एवं सहज मार्ग को जानने में सुरु के कई महीनों में मिला मै त्रीणि हु भाई कंही तो सच का जीवन मै अभ्युदय इतनी आसानी से भी कहा होता हैं। बचपन से 58की इस उम्र तक कुछ भी आसानी से नही प्राप्त कर पाया। एक जिद ही हैं जो मुझे मंजिल तक पहुचाती हैं।
        45साल की उम्र साज58साल होने तक सहज मार्ग में प्रगति का तो पता नही स्वर्ग की प्राप्ति या नरक की; पता नहीबस  इतना पता  हैं  मन में शांति है, अपने अप को समझना आसान हो गया हैं। काफी हल्का सा महसूस कर रहा हु।



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